कुरुक्षेत्र(TN) पिछले कुछ दिनों से कुरुक्षेत्र व यमुनानगर जिलों के क्षेत्रों में नीची ऊंचाई पर उड़ान भरता एक हेलिकॉप्टर लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बहुत कम लोगों को इसके बारे में जानकारी होगी। लोग इसे लेकर अलग अलग विचार रख रहे हैं। टीम ने आपके लिए जुटाई है स्कैनिंग उपकरण लगे इस हेलिकॉप्टर की विस्तृत जानकारी।
असल बात यह है कि केंद्र सरकार ने देश के पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भूजल स्तर को सुधारने के लिए पिछले वर्ष तैयारी शुरू की थी। इसके तहत राजस्थान, गुजरात, हरियाणा व पंजाब के 3.88 लाख वर्ग किमी सूखे क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से हवाई सर्वे करने की काम को मंजूरी दी गई थी। हालांकि राजस्थान में यह कार्य पिछले वर्ष 5 अक्तूबर को केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने झंडी दिखाकर शुरू करवाया था, जबकि हरियाणा में ये हेलीबॉर्न सर्वे अब हो रहा है।
मिडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए हेलिकॉप्टर में उच्च तकनीक के सयंत्र द्वारा सर्वेक्षण हो रहा है जिसके लिए केंद्रीय भूमिजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) जल शक्ति मंत्रालय और सीएसआईआर- एनजीआरआई, हैदराबाद के बीच 21 दिसंबर 2020 को करार हुआ था। इसके तहत शुष्क क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर से सर्वे किया जाएगा। सर्वे में जो भी बिन्दु सामने आएंगे, उनके अनुसार भूजल स्तर को सुधारने के लिए काम किया जाएगा।
हरियाणा में 2,500 वर्ग किलोमीटर में होगा सर्वे
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सर्वेक्षण के अन्तर्गत, पहले चरण (2021-22) में लगभग एक लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे होगा जिसमें राजस्थान के आठ ज़िलों का लगभग 65,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, गुजरात के 5 जिलों का लगभग 32,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और हरियाणा के 2 जिलों का लगभग 2,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सम्मिलित है।
इन जिलों पर मंडराएगा हेलिकॉप्टर
हेलिकॉप्टर सर्वेक्षण में हरियाणा के कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जिले शामिल किए गए हैं। राजस्थान के सीकर, जैसलमेर और जोधपुर जिलों में 16,738 वर्ग किमी क्षेत्र तथा गंगानगर, बीकानेर, चुरू, पाली और जालोर जिलों में 50072 वर्ग किमी क्षेत्र में सर्वे किया जाएगा। गुजरात के राजकोट, जामनगर, मोरबी, सुरंद्रा नगर और देवभूमि द्वारका जिलों के 31907 वर्ग किमी क्षेत्र में सर्वे किया जाएगा।
सर्वेक्षण में होंगे ये काम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सर्वेक्षण से जलभृत मानचित्र, कृत्रिम पुनर्भरण के स्थानों, 3-डी जियो फिजिकल मैप बनाने के साथ साथ असंतृप्त जलभृतों की जानकारी और भूमिगत पानी की गुणवत्ता की पहचान की जाएगी। इस सर्वे से इन सूखे स्थलों में जमीन के अंदर है की मात्रा व एक्विफर की संख्या की जानकारी मिलने के साथ ही जमीन के अंदर पुरानी जलधारा के नेटवर्क का भी पता लगाया जाएगा।

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