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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 13 Sep 2021 09:37 PM IST

सार

दरअसल, सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 19 सितंबर को होनी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका में सुनवाई की, जिसमें सरकार के उम्र सीमा निर्धारण को सही बताया गया है।

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झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन (जेपीएससी) की सातवीं सिविल परीक्षा से पहले झारखंड सरकार को शीर्ष कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। सोमवार को उम्र सीमा के निर्धारण के मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायाधीश एमआर शाह और न्यायाधीख एएस बोपन्ना की पीठ ने सरकार से पूछा कि जब पांच साल बाद परीक्षा हो रही है, तो क्या वह अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में एक बार छूट दी जा सकती है? इसके लिए कोर्ट 21 सितंबर तक की मोहलत दी है। उसी दिन इसकी अगली सुनवाई भी होनी है।

दरअसल, सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 19 सितंबर को होनी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका में सुनवाई की, जिसमें सरकार के उम्र सीमा निर्धारण को सही बताया गया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ चार से अधिक अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रार्थी रीना कुमारी, अमित कुमार सहित अन्य की याचिका पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने नियमावली बनाने से पूर्व के पदों को भी नए विज्ञापन में शामिल कर लिया है। इसमें उम्र सीमा का निर्धारण नए तरीके से लागू है। सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर नियमों को बदला है। आधिकारिक आदेश से नियमों के प्रावधानों को नहीं बदला जा सकता है। जेपीएससी 21 सालों में सिर्फ छह परीक्षाएं ही ले पाया है। इस परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को काफी उम्मीदें थी, जो अब पूरी नहीं हो पा रही हैं। इस पर कोर्ट ने मौखिक कहा कि हम आपकी परेशानी समझ रहे हैं, लेकिन निर्धारण सरकार का निर्णय है।

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट में सरकार के उम्र सीमा के निर्धारण को चुनौती दी गई थी। इसमें प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया था कि नियमानुसार जेपीएससी को हर साल परीक्षा आयोजित करनी थी। पूर्व में जेपीएससी की ओर से निकाले गए विज्ञापन में उम्र का निर्धारण वर्ष 2011 रखा गया था। लेकिन इसे वापस लेते हुए दोबारा संशोधित विज्ञापन जारी किया गया। जिसमें उम्र के निर्धारण वर्ष 2016 कर दिया गया। पांच वर्ष उम्र अधिक होने की वजह से हजारों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।

विस्तार

झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन (जेपीएससी) की सातवीं सिविल परीक्षा से पहले झारखंड सरकार को शीर्ष कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। सोमवार को उम्र सीमा के निर्धारण के मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। न्यायाधीश एमआर शाह और न्यायाधीख एएस बोपन्ना की पीठ ने सरकार से पूछा कि जब पांच साल बाद परीक्षा हो रही है, तो क्या वह अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में एक बार छूट दी जा सकती है? इसके लिए कोर्ट 21 सितंबर तक की मोहलत दी है। उसी दिन इसकी अगली सुनवाई भी होनी है।

दरअसल, सातवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 19 सितंबर को होनी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका में सुनवाई की, जिसमें सरकार के उम्र सीमा निर्धारण को सही बताया गया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ चार से अधिक अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रार्थी रीना कुमारी, अमित कुमार सहित अन्य की याचिका पर पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने नियमावली बनाने से पूर्व के पदों को भी नए विज्ञापन में शामिल कर लिया है। इसमें उम्र सीमा का निर्धारण नए तरीके से लागू है। सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर नियमों को बदला है। आधिकारिक आदेश से नियमों के प्रावधानों को नहीं बदला जा सकता है। जेपीएससी 21 सालों में सिर्फ छह परीक्षाएं ही ले पाया है। इस परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को काफी उम्मीदें थी, जो अब पूरी नहीं हो पा रही हैं। इस पर कोर्ट ने मौखिक कहा कि हम आपकी परेशानी समझ रहे हैं, लेकिन निर्धारण सरकार का निर्णय है।

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट में सरकार के उम्र सीमा के निर्धारण को चुनौती दी गई थी। इसमें प्रार्थियों की ओर से अदालत को बताया गया था कि नियमानुसार जेपीएससी को हर साल परीक्षा आयोजित करनी थी। पूर्व में जेपीएससी की ओर से निकाले गए विज्ञापन में उम्र का निर्धारण वर्ष 2011 रखा गया था। लेकिन इसे वापस लेते हुए दोबारा संशोधित विज्ञापन जारी किया गया। जिसमें उम्र के निर्धारण वर्ष 2016 कर दिया गया। पांच वर्ष उम्र अधिक होने की वजह से हजारों अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।

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